देवप्रयाग टाईम्स
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आवास पर डॉ. पूर्णानंद उनियाल द्वारा लिखित पुस्तक “जीवनदायनी हिमालयी वनौषधीयो के अनुभव एवं मेरे संस्मरण” का विमोचन रविवार को किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र की वन औषधियों पर आधारित यह कृति स्वास्थ्य, पर्यावरण और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
पुस्तक लेखक डॉ. पूरिपूर्णानद उनियाल का जन्म 1941 में उत्तराखंड के टिहरी जिले पट्टी मखलोगी स्थित ग्राम बंगाली में हुआ था उनकी बेसिक शिक्षा गांव में ही हुई आगे उन्होंने वर्ष 1950 में दिल्ली से मेडिकल साइंस में स्नातक शिक्षा ली 1967 से 1999 तक उन्होंने अपनी स्वास्थ्य सेवाएं विभिन्न जिलों में दी इस दौरान वह राजकीय चिकित्सालय देवप्रयाग में भी कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दी उन्होंने 82 वर्ष की उम्र में अपनी मेहनत और लगन से अपने दीर्घ अनुभवों और स्मरणों के माध्यम से हिमालयी वन औषधियों की उपयोगिता, उनके जीवनदायनी गुणों तथा पारंपरिक उपचार पद्धतियों को सरल भाषा में इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है। इस पुस्तक को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उनकी धर्मपत्नी विजया उनियाल और उनके बड़े पुत्र अनिरुद्ध उनियाल ने उनका सहयोग किया इस पुस्तक के माध्यम से स्वस्थ रहने के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाने के व्यावहारिक तरीके और घरेलू नुस्खे भी इसमें शामिल किए हैं।
इसे से पूर्व भी उन्होंने स्वास्थ शिक्षा पुस्तिका नवंबर 2003 में प्रकाशित की जिसका विमोचन पर्यावरण विद् श्री सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा किया गया था
इस विमोचन कार्यक्रम में डॉ. पूर्णानंद उनियाल के साथ गिरीश चंद्र भट्ट पत्रकार देवप्रयाग, बी॰ के॰ डोभाल पूर्व वैज्ञानिक और राजेंद्र प्रसाद उनियाल देहरादून भी उपस्थित रहे। अतिथियों ने पुस्तक को आम जनमानस के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि यह कृति नई पीढ़ी को प्रकृति से जुड़ने और पारंपरिक ज्ञान को समझने के लिए प्रेरित करेगी।